12 Jyotirling Ke Naam
वेलकम टू माय blog में हूं आपका दोस्त janak singh। आदि अनादि अनंत देवों के देव महादेव संपूर्ण धरती पर शिव के अवशेष की गिनती करना कठिन ही नहीं लगभग असंभव कार्य है। आपने हर गली चौराहे पर शिव मंदिर जरूर देखा होगा और लगभग सभी शिव मंदिरों में आपने शिवलिंग देखा होगा संपूर्ण पृथ्वी पर भगवान शिव जहां-जहां स्वयं प्रकट हुए वहां पर शिव का जागृत रूप शिवलिंग के रूप में स्थापित हुए और धरती पर कुल 12 स्थानों पर शिव प्रकट हुए और इस प्रकार कुल 12 jyotirling की स्थापना की गई।
कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति इन 12 शिवलिंग और12 jyotirling के दर्शन कर लेता है उसे मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीते जी उसके सारे संकट सारी बाधाएं समाप्त हो जाती है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है कहा जाता है शिवरात्रि के दिन स्वयं देवगढ़ देवता भी इन jyotirling के दर्शन के लिए धरती पर आकर इनके दर्शन करते हैं तो धरती पर कहां-कहां है यह शिवलिंग और क्या नाम है इन jyotirling की सारी जानकारी शेयर करूंगा इस blog में लेकिन शुरू करने से पहले दोस्तों मेरी आपसे रिक्वेस्ट है यह जानकारी आपको अच्छा लगे तो लाइक कीजिए और यदि आपने हमारा blog सब्सक्राइब ya follow नहीं किया है तो कृपया सब्सक्राइब or follow कर लीजिए इस blog पर हम लेकर आते हैं आपके लिए ढेर सारी धार्मिक जानकारियां होम बटन पर क्लिक कर कर लीजिए ।
12 Jyotirling Ke Naam part -1
धरती का पहला jyotirling है सोमनाथ भारत के गुजरात में स्थित है माना जाता है कि यह jyotirling गुजरात के क्षेत्र में स्थित है यह भारत का ही नहीं बल्कि संपूर्ण पृथ्वी का पहला jyotirling है । शिव पुराण के अनुसार एक बार प्रजापति दक्ष अर्थात चंद्रमा को श्राप दे दिया था तब चंद्रमा द्वारा इसी स्थान पर भगवान शिव को प्रसन्न किया गया था और शिव ने उन्हें दर्शन देकर श्राप मुक्त किया था माना जाता है कि सोमनाथ jyotirling की स्थापना स्वयं के द्वारा की गई है ।
भारत के आंध्र प्रदेश में आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्री श्याम नामक पर्वत पर स्थित jyotirling को मल्लिका अर्जुन कहा जाता है इस मंदिर का महत्व कैलाश पर्वत के समान माना जाता है । यहां भगवान शिव स्वयं निवास करते हैं कहते हैं । इस jyotirling के दर्शन मात्र से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है सभी कष्ट दूर होते हैं ।
12 Jyotirling Ke Naam part -3
तीसरा jyotirling महाकालेश्वर महाकाल के नाम से भी प्रसिद्ध है । भारत के मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित महाकालेश्वरjyotirling धरती का एकमात्र दक्षिणमुखी मुखी jyotirling है । पूरे विश्व में यहां पर की जाने वाली आरती प्रसिद्ध है । इस आरती के jyotirling के दर्शन के लिए लाखों लोग प्रतिवर्ष यहां आते हैं कहते हैं महाकालेश्वर महाकाल के दर्शनों से प्राणी मृत्यु के भय से दूर हो जाता है । उसकी आयु में वृद्धि होती है और उसे ऐसे नहीं मरना होता है ।
12 Jyotirling Ke Naam part -4
चौथा jyotirling है ओंकारेश्वर jyotirling भी भारत के मध्य प्रदेश में स्थित है । यह मंदिर इंदौर शहर के पास स्थित है जहां पर jyotirling स्थापित नदी बहती है और पहाड़ों के चारों ओर इस नदी के यहां ओम का आकार बनता है । कहते हैं कि ओम शब्द की उत्पत्ति जगतपिता ब्रह्मा के मुंह से हुई यह jyotirling ओम का आकार नहीं हुए हैं इसीलिए इसे ओमकारेश्वर नाम से जाना जाता है ।
12 Jyotirling Ke Naam part -5
पांचवा jyotirling है केदारनाथ तो आप भली-भांति परिचित होंगे दोस्तों केदारनाथ स्थित jyotirling को भी भगवान के 12 jyotirling में से एक माना गया है यह मंदिर बाबा केदारनाथ के नाम से प्रसिद्ध है तथा बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है अत यहां भी लाखों की संख्या में लोग बाबा केदारनाथ के दर्शनों के लिए आते हैं ।
12 Jyotirling Ke Naam part -6
6वा jyotirling भीमाशंकर महाराष्ट्र के पुणे जिले में नाम का एक पर्वत है और इसी पर्वत पर स्थित है । भीमाशंकर jyotirling कहा जाता है कि जो भी भक्त यहां प्रतिदिन प्रात सूर्योदय के बाद यहां दर्शन करने आता है उसके सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसके लिए स्वर्ग के रास्ते दरवाजे खुल जाते हैं ।
12 Jyotirling Ke Naam part -7
7वा jyotirling स्थित है उत्तर प्रदेश के पूरे भारत में काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे बड़ा धर्म स्थल माना जाता है इस jyotirling को काशी विश्वनाथ के नाम से जाना जाता है कहा जाता है कि प्ले आने पर भी यह स्थान बना रहेगा नष्ट नहीं होगा क्योंकि इस स्थान की रक्षा स्वयं भगवान श्री करते हैं ।
12 Jyotirling Ke Naam part -8
आठवां jyotirling है किरण के स्वर महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोदावरी नदी के करीब स्थित यह शिवलिंग त्रंबकेश्वर के नाम से जाना जाता है । यही पास में ब्रह्मा गिरी पर्वत है और यही पर्वत गोदावरी नदी का उद्गम स्थान है कहते हैं कि भगवान शिव ने यहां गौतम ऋषि को दर्शन दिए थे और उन्हीं के आग्रह पर निवेदन पर शिव वहां jyotirling के रूप में स्थापित हुए थे ।
12 Jyotirling Ke Naam part -9
9वा jyotirling है वैद्यनाथ यह स्थान पूर्व में बिहार एवं वर्तमान में झारखंड राज्य में संथाल परगना के दुमका नमक जनपद में स्थित है इसे वैद्यनाथ धाम भी कहा जाता है यहां भी हजारों की संख्या में लोग वैद्यनाथ के दर्शन के लिए आते हैं
12 Jyotirling Ke Naam part -10
10 वा jyotirling गुजरात के भारी छेत्र द्वारिका स्थान में स्थित है नागेश्वर jyotirling कहा जाता है भगवान शिव का एक नाम नागेश्वर भी है स्थान द्वारिकापुरी से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित है कहा जाता है कि यह jyotirling मनोकामनाएं पूर्ण करता है । जो भी व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा भाव से यहां दर्शनों के लिए आता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।
12 Jyotirling Ke Naam part -11
11 वा jyotirling रामेश्वरम तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम स्थान पर स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग हिंदुओं के चार धाम में से एक माना जाता है कहा जाता है कि रावण से युद्ध करने के लिए प्रस्थान करने से पहले एवं श्री राम ने इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी और स्वयं रावण ने वहां आकर ब्राह्मण कर्म करते हुए श्री राम को पूजा-अर्चना करवाई थी भगवान श्री राम द्वारा स्थापना किए जाने के कारण ही इसे रामेश्वरम कहां गया है ।
12 Jyotirling Ke Naam part -12
अंतिम है महाराष्ट्र के संभाजी नगर के पास दौलताबाद के समीप में महाराष्ट्र का प्रसिद्ध मंदिर धनेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं किसी मंदिर के समीप में स्थित है ।
दोस्तों यह थी 12 jyotirling की संक्षिप्त जानकारी यदि आप jyotirling के दर्शन के लिए जाना चाहते हैं । तो इसके लिए ट्रैवल गाइड तैयार की जा सकती है यदि आप लोग प्रेरणा देंगे तो मैं इन स्थानों तक कैसे पहुंचे प्रत्येक स्थान की विस्तृत जानकारी के लिए blog बना दूंगा आप अपने सुझाव कमेंट करके मुझे बता सकते हैं तो दोस्तों यह जानकारी एक blog आपको अच्छा लगा हो तो कृपया लाइक के बटन पर क्लिक कीजिए ।











